डॉ. दीनानाथ यादव के शोध मॉडल को छत्तीसगढ़ शासन ने माना बाल संरक्षण का मजबूत आधार

पाँच वर्षों की शोध-साधना लाई रंग; स्कूल स्तरीय बाल संरक्षण समिति में बच्चों की सक्रिय सहभागिता पर जोर

रायपुर। पाँच वर्षों की अथक मेहनत, निरंतर अध्ययन, अंतरराष्ट्रीय अनुभवों और जमीनी शोध की साधना आखिरकार रंग लाई। समाजकार्य विषय में डॉ. दीनानाथ यादव द्वारा किए गए पीएचडी शोध के निष्कर्षों से विकसित स्कूल स्तरीय बाल संरक्षण समिति के क्रियान्वयन मॉडल को अब प्रशासन ने बाल हितैषी नियोजन और प्रभावी कार्रवाई के लिए मजबूत आधार माना है।

शोध के परिणामों को संदर्भित करते हुए जिला प्रशासन रायपुर ने संबंधित विभागों को प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। विभाग द्वारा इस आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक रूपरेखा तैयार कर संबंधित विभागों को कार्रवाई हेतु निर्देशित किया गया है।

यह उपलब्धि इसलिए विशेष है कि डॉ. यादव का शोध केवल एक शोध प्रबंध बनकर विश्वविद्यालय की अलमारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसके निष्कर्ष अब बच्चों की सुरक्षा, बाल अधिकारों और बाल हितैषी प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में जमीनी कार्रवाई का आधार बन रहे हैं। डॉ. यादव ने इस उपलब्धि के लिए अपने गुरुजनों के मार्गदर्शन तथा प्रशासनिक अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के सहयोग के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया है।
शोध से निकला मॉडल अब जमीन पर उतरेगा
पीएचडी शोध के दौरान डॉ. यादव ने स्कूल स्तर पर बाल संरक्षण व्यवस्था की वास्तविक स्थिति, उसकी चुनौतियों और प्रभावी क्रियान्वयन की संभावनाओं का गहन अध्ययन किया। इसी अध्ययन के आधार पर स्कूल स्तरीय बाल संरक्षण समिति के प्रभावी संचालन का एक व्यावहारिक मॉडल तैयार किया गया।
इस मॉडल का उद्देश्य विद्यालयों में बाल संरक्षण को केवल औपचारिक समिति और प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित न रखते हुए उसे सक्रिय, सहभागी और जवाबदेह व्यवस्था के रूप में विकसित करना है।
मॉडल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें बच्चों को केवल बाल संरक्षण योजनाओं के लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि व्यवस्था के सक्रिय सहभागी और प्रतिनिधि के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई है। बच्चों को उनके अधिकारों, बाल संरक्षण कानूनों, सुरक्षित-असुरक्षित व्यवहार, बाल शोषण एवं हिंसा की रोकथाम तथा सहायता और शिकायत तंत्र के संबंध में प्रशिक्षण एवं जागरूकता प्रदान की जाएगी।
इसके माध्यम से बच्चे अपने विद्यालय में बाल संरक्षण के जागरूक प्रतिनिधि की भूमिका निभा सकेंगे। वे बाल संरक्षण से संबंधित गतिविधियों, जागरूकता कार्यक्रमों और सुरक्षित विद्यालयी वातावरण के निर्माण में सक्रिय भागीदारी करेंगे तथा किसी घटना या जोखिम की स्थिति में निर्धारित व्यवस्था के माध्यम से उसकी सूचना संबंधित समिति या सक्षम संस्था तक पहुंचाने में सहयोग करेंगे।
बच्चों की सहभागिता से मजबूत होगा बाल संरक्षण तंत्र
इस मॉडल का प्रभाव केवल बच्चों को जागरूक करने तक सीमित नहीं रहेगा। इसका उद्देश्य बच्चों को निर्णय एवं कार्रवाई की प्रक्रिया में सहभागी बनाना है, ताकि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने के साथ-साथ अपने साथियों के अधिकारों और सुरक्षा के प्रति भी जिम्मेदार बनें।
बाल संरक्षण से जुड़ी घटनाओं की समय पर पहचान, सूचना, संदर्भन और आवश्यक कार्रवाई के लिए विद्यालय स्तर पर एक व्यवस्थित तंत्र विकसित किया जा सकेगा। इससे बच्चे, शिक्षक, अभिभावक, विद्यालय प्रबंधन, समुदाय और प्रशासन के बीच समन्वित बाल संरक्षण व्यवस्था तैयार होने की संभावना है।
मॉडल के प्रभावी क्रियान्वयन से विद्यालयों में सुरक्षित वातावरण, बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता, जोखिमग्रस्त बच्चों की समय पर पहचान, शिकायतों के उचित निराकरण और बाल संरक्षण गतिविधियों की नियमित निगरानी को मजबूती मिल सकती है।
बाल हितैषी नीति-नियोजन: बच्चों की सहभागिता से प्रतिनिधित्व तक
इस मॉडल की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह बाल संरक्षण की पारंपरिक “बच्चों के लिए नीति” की अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए “बच्चों की नीति में सहभागिता और प्रभावी क्रियान्वयन हेतु प्रतिनिधि के रूप कार्य” की दिशा में प्रयास करता है।
बच्चों को प्रशिक्षित एवं जागरूक कर उन्हें विद्यालय स्तरीय बाल संरक्षण समिति की गतिविधियों में सहभागी बनाने से स्थानीय एवं सामुदायिक स्तर पर बाल हितैषी नियोजन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। इससे बाल संरक्षण संबंधी नीतियों और योजनाओं के क्रियान्वयन में जमीनी स्तर पर बच्चों की आवाज और अनुभव को भी स्थान मिल सकेगा।
यही इस शोध मॉडल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है कि इसमें बच्चे केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि बाल संरक्षण व्यवस्था के भागीदार और परिवर्तन के प्रतिनिधि बनेंगे।
अमेरिका से अफ्रीका तक का अध्ययन, फिर भारतीय राज्यों का अवलोकन
डॉ. दीनानाथ यादव ने बताया कि शोध को व्यापक और व्यावहारिक बनाने के लिए उन्होंने अमेरिका, कनाडा और अफ्रीकी देशों में बाल संरक्षण की व्यवस्थाओं का अध्ययन किया। इसके साथ ही भारत के विभिन्न राज्यों, विशेष रूप से गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्यप्रदेश में बाल संरक्षण से जुड़ी कार्यप्रणाली का अध्ययन एवं प्रत्यक्ष अवलोकन किया।
विभिन्न देशों और राज्यों की व्यवस्थाओं के तुलनात्मक अध्ययन के बाद स्थानीय परिस्थितियों और आवश्यकताओं के अनुरूप मॉडल विकसित किया गया, जिसका उद्देश्य स्कूल स्तर पर बच्चों की सुरक्षा और बाल संरक्षण व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित, सहभागी और प्रभावी बनाना था।
“शोध तभी सार्थक है, जब उसका लाभ समाज को मिले”
डॉ. दीनानाथ यादव ने इस उपलब्धि को अपनी पाँच वर्षों की शोध-साधना का परिणाम बताते हुए कहा कि उनके लिए यह केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि शोध की सामाजिक स्वीकार्यता और सार्थकता का प्रमाण है।
उन्होंने कहा, “किसी शोधार्थी के लिए इससे बड़ी खुशी क्या हो सकती है कि वर्षों तक किए गए अध्ययन और शोध के निष्कर्ष समाज के किसी महत्वपूर्ण वर्ग के हित में उपयोग किए जाएं। बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों से जुड़ा विषय मेरे लिए केवल अकादमिक विषय नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है।”
उन्होंने अपने शोध मार्गदर्शक, गुरुजनों तथा शोध कार्य में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों एवं सहयोगियों के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया।
ICSSR और UGC-CRY से मिला शोध को प्रोत्साहन
उल्लेखनीय है कि डॉ. दीनानाथ यादव को पीएचडी शोधार्थी के रूप में ICSSR एवं UGC-CRY की ओर से फेलोशिप एवं सम्मान भी प्राप्त हुआ है।
उनके द्वारा प्रकाशित पुस्तक “बाल लैंगिक शोषण के विविध आयाम: चुनौतियाँ एवं संभावनाएँ” को उत्कृष्ट पुस्तक के रूप में छत्तीसगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा भी सम्मानित किया गया है।
उनके पीएचडी शोध के मार्गदर्शक प्रोफेसर अमित राय रहे हैं, जो वर्तमान में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, कोलकाता केंद्र के निदेशक हैं।
शोध कार्य को पूर्ण करने में विभाग के निदेशक प्रोफेसर मनोज कुमार, सहायक प्राध्यापक डॉ. अमोद गुर्जर, डॉ. मिथिलेश तिवारी, डॉ. शिव सिंह बघेल एवं डॉ. गजानंद का विशेष सहयोग रहा।
वर्तमान में डॉ. दीनानाथ यादव कोलंबिया प्रोफेशनल विश्वविद्यालय, रायपुर के कला एवं मानविकी विद्यापीठ में डीन के पद पर कार्यरत हैं।
शोध की सफलता पर बधाइयों का दौर
डॉ. यादव के शोध के परिणामों को प्रशासनिक कार्रवाई का आधार बनाए जाने पर कोलंबिया प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति, प्रतिकुलाधिपति, कुलपति, प्रतिकुलपति, रजिस्ट्रार, अन्य शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं जिला प्रशासन के अधिकारियों ने उन्हें बधाई दी है।